घनघोर तिमिर में , अंधकार को चुनौती देने का दु:साहस ,जो कर सकते थे ...वो सब नदारद हैं ....सूरज कही जाकर, छुपा सुबह की प्रतीक्षा कर रहा है ..वहीँ चन्द्र अंधकार की सत्ता से दबा दबा दुबला हुवा बादलों की ओट में छिपा बैठा है ......तब ....अकेला एक नन्हा सा दिया थोड़े से तेल की संपदा लिए अपनी अहंकार रूपी बाती को जलाते हुए अंधकार को चुनौती देने खड़ा हो गया है .... दीपावली का पर्व एक आव्हान है ...आओ दीप की तरह ऊँठ खड़े हों.....भ्रस्टाचार के खिलाफ .....
दीपावली की शुभकामनायें ...